होम

शॉर्ट्स

देखिये

क्विज

फ़ास्ट न्यूज़


तीन नए कानून एक जुलाई से होंगे लागू, ऑनलाइन दर्ज हो सकेगी FIR, कई और बड़े बदलाव
News Date:- 2024-06-27
तीन नए कानून एक जुलाई से होंगे लागू, ऑनलाइन दर्ज हो सकेगी FIR, कई और बड़े बदलाव
prince raj

,27 Jun 2024

तीन अहम कानून भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023, एक जुलाई से लागू हो रहे है. इन तीनों कानूनों के तहत जीरो एफआइआर, आनलाइन रिपोर्ट दर्ज और इलेक्ट्रानिक माध्यमों से समन भेजना और गंभीर अपराधों में क्राइम सीन की अनिवार्य वीडियोग्राफी शामिल है. 

नए आपराधिक कानूनों के लिए बुनियादी स्तर पर पुलिसकर्मियों व अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है. इसमें 5.65 लाख पुलिस कर्मी, जेल अधिकारी शामिल हैं. 

नए कानूनों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकी दखल बढ़ने से नेशनल क्राइम रिकॉ‌र्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी सहायता देने की व्यवस्था की गई है. अब देश के सभी पुलिस स्टेशनों में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) एप्लिकेशन के तहत केस दर्ज होंगे. 

नए आपराधिक कानून में 10 अहम प्रविधान-

 

  • नए कानून में जीरो एफआइआर की शुरुआत की गई है. पीडि़त किसी भी थाना क्षेत्र में अपनी एफआइआर दर्ज करा सकता है. पीडि़त को एफआइआर की निशुल्क कॉपी भी मिलेगी. 
  • सशक्त जांच के लिए गंभीर आपराधिक मामलों में सुबूत जुटाने के लिए क्राइम सीन पर फारेंसिक विशेषज्ञों का जाना अनिवार्य होगा.  सुबूत एकत्र करने की प्रक्रिया में वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी.
  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध में जांच एजेंसियों को दो महीने के अंदर जांच पूरी करनी होगी. 90 दिनों के अंदर पीडि़तों को केस में प्रगति की नियमित अपडेट देनी होगी.
  • एक व्यक्ति पुलिस स्टेशन जाए बगैर भी इलेक्ट्रानिक माध्यमों से घटना की रिपोर्ट कर सकता है. इससे पुलिस को भी त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी.
  • पराध के शिकार महिला और बच्चों को सभी अस्पतालों में फ‌र्स्ट एड या इलाज निशुल्क मिलने की गारंटी होगी. चुनौती भरी परिस्थितियों में भी पीडि़त जल्द ठीक हो सकेंगे.
  • गवाहों की सुरक्षा व सहयोग के लिए सभी राज्य सरकारें विटनेस प्रोटेक्शन प्रोग्राम लागू करेंगी। दुष्कर्म पीडि़ताओं को आडियो-वीडियो माध्यम से पुलिस के समक्ष बयान दर्ज करने की छूट मिलेगी।
  • नए कानून में मामूली अपराधों के लिए दंडस्वरूप सामुदायिक सेवा की विधा शुरू। समाज के लिए सकारात्मक योगदान देकर दोषी अपनी गलतियों को सुधारने का काम करेगा।
  • सुनवाई में देरी से बचने और न्याय की त्वरित बहाली के लिए कोई अदालत किसी मामले को अधिकतम दो बार ही स्थगित कर सकेगी. सभी कानूनी कार्यवाही इलेक्ट्रानिक माध्यमों से हो सकेगी. 
  • पीड़ित महिला की अदालती सुनवाई महिला मजिस्ट्रेट ही करेगी. अन्यथा संवेदनशील मामले में किसी महिला की उपस्थिति में पुरुष मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज होगा.

Articles